Gazal shayri

आजकल मै इस कदर सजने  लगी हूं,
बैठ कर सामने आइने के खुद पर मरने लगी हूं,
बैठ कर तेरे आगोश में,

कुछ कुछ करने लगी हूं।।

लो मान लिया मैने मेरी जान,
मै भी इश्क़ करने लगी हूं
हां हां मै भी तुमसे दूर होने से,
तुम्हे खोने से डरने लगी हूं,

दिन क्या, शाम क्या, क्या रात,
हर लम्हा तुम्हे ढूंढने लगी हूं,
तड़प कर मचल कर बहक करके,
तुम संग नशे में मै भी झूमने लगी हूं,

खुद को देख खुद ही शरमाना,
नज़रे मिलना और चुराना,
देखो ना हालात मेरे,
एक पल तुम बिन ना जी पाना,

जो करना है करो अब,
दुनिया से ना डरो अब,
तुम मेरे हो तो पास रहो,
मेरी भी तो कुछ सुनो अब।।

❤️❤️प्रवीन सिमरन❤️❤️

0 Comments: