Hindi Social Poem

 खाना हो तो गम खाओ, आंसू पीकर मस्त रहो,
गम सहने की चीज है यारो, गम दूजे से नहीं कहो,
जला सके तो अहम जला दो, वरना अहम जला देगा,
हिर्णाकुश और रावण की भांति, तुमको भी मरवा देगा।।

❤️❤️प्रवीन सिमरन❤️❤️

बुरे कर्म करने वाले को, मिलते परमानंद नहीं,
दुख की पोध लगाइया के , मिलता है आंनद नहीं,
देख सके तो सपना देखो, फिर वो शुभ दिन आएगा,
भारत माता पुनः जगत में, विश्व गुरु का पद पाएगा।।

❤️❤️प्रवीन सिमरन❤️❤️


खाना हो तो गम खाओ, आंसू पीकर मस्त रहो,
गम सहने की चीज है यारो, गम दूजे से नहीं कहो,
जला सके तो अहम जला दो, वरना अहम जला देगा,
हिर्णाकुश और रावण की भांति, तुमको भी मरवा देगा।।

❤️❤️प्रवीन सिमरन❤️❤️

 

जो किसी के काम आए,
उसे इंसान कहते हैं,
दूजे का दुख को अपनाए,
उसे इंसान कहते है,
कहीं सुख है कहीं दुःख है,
इसी का नाम है जीवन,
जो गिर के संभल जाए,
उसे इंसान कहते हैं।।

❤️❤️प्रवीन सिमरन❤️❤️

कल - कल बहता सुन्दर पानी,
कितना है ये निर्मल पानी,
दिन रात ये बहता रहता,
कभी न थकता कभी ना रुकता,
झरनों में ये झर- झर करता,
फसलों को यह सींचा करता,
नदियों में यह कल - कल बहता,
हर प्राणी की प्यास बुझाता,
किसी कारण आंखों में आ जाता,
तो यह दिल का दर्द बताता।।

❤️❤️प्रवीन सिमरन❤️❤️


0 Comments: