इन हाथों में तेरे हाथ की जरुरत है,

मुझे अब भी तेरे साथ की जरूरत है,

जान हो मेरी, मेरी कभी जान ना लेना,

मुझे हर पल सुहागरात की जरूरत है।

 

तेरी नज़रों में बस खुद को देखना चाहूंगी,

नज़रों से उतरकर तेरे दिल में रहना चाहूंगी,

दिल से कहना की छो+ डे ना कभी,

"मै तो तेरा हर दर्द सहना चाहूंगी"।

 

जाने क्या हुआ रातों की नींद को,

जाने क्या हुआ सुबह के चैन को,

कुछ काम नहीं जीने के सिवा अब,

बस याद करती हूं उस ई+द को।

 

ख्वाबों में जीना कुछ मुश्किल सा है,

जल्दी से बाहों में आ जाओ,

समेट कर बाहों में अपनी,

चलो ना मुझ संग पिघल जाओ।

 

प्रवीन सिमरन

एक नारी होने का अर्थ ये नही है, की वो हमेशा झुकती रहे,

एक नारी होने का अर्थ ये नही है, की वो हमेशा झुकती रहे,

 

 

 

 

एक नारी होने का अर्थ ये नही है, की वो हमेशा झुकती रहे,

ना ही पुरुष होने का अर्थ है की, वो हमेशा जुल्म करे।।

तुम कहो तो दर्द दिल के, संग तुम्हारे बांट लूं क्या,

ये लंबी उम्र की तमाम रातें, संग तुम्हारे काट लूं क्या?

चेहरे पर मुस्कान लिए भी जिंदा हूं,

इस दिल में शमशान लिए भी जिंदा हूं,

जलती चिता सा रहा मेरा ये मन,

ना जी पाई और ना बचा जीवन।।

हाय! उड़ते बादलों सी मै हवा,

ना बन सकी इन बर+सातों की दवा,

उठते उन्मादों की लहर में बहती मै,

दर्द हंसता मुझपर, रोती उमंगे जवा।।

मन की आंधियों में उड़ती चली आई मै,

सुख दुख के बन्धन में किवाड़ सी छाई मै,

ना इधर की ना उधर की रही,

अधमरी सी हूं एक परछाई मै।।

कुचली जाती हूं हर बार किस्मत द्वारा,

ना मिलता है कर्मो का कोई सहारा,

धर्म की रस्सी बड़ी कमजोर है,

कैसे करूं अब इस जीवन से किनारा?

 

प्रवीन सिमरन

कुछ ज्यादा ना दे बस अपना साथ दे दे,

कुछ ज्यादा ना दे बस अपना साथ दे दे,

 

 

 

 

कुछ ज्यादा ना दे बस अपना साथ दे दे,

वादे जन्मों के ना कर सुकून की रात दे दे,

ना चैन है इक भी पल हड़बड़ जिंदगी में,

कदमों से कदम मिला, हाथो में हाथ दे दे।।

 ❤प्रवीन सिमरन

 

जिंदगी का बस इतना फसाना रहा,

जो मेरा है उसका दूर जाना रहा,

बार बार कहता है चल संग चल,

ये कहना तो बस इक बहाना रहा।

 तेरी सांस हूं मैं, तुझमें रहती हूं,

बस यही सोच कर तुमसे मिलकर जाना ना रहा,

तुम कितने बदले बदले से लगते हो,

मेरा तो इश्क, वही सदियों सा जमाना रहा।

 जब जी चाहे तब पास आना,

जी करे चले जाना जब भी जाना रहा,

तेरा इंतजार करते करते,

मेरा तो अभी भी वहीं ठिकाना रहा।

 तुम बिन सूनी सूनी है गालियां इश्क की,

मेरा फिर भी मचलना, तेरे इश्क में नहाना रहा,

तुम्हे सजाना अपनी आंखों में,

तुम्हे उम्र भर चाहना रहा।

 किसी न किसी मोड़ पर तुम मेरे होगे,

मेरा मेरे दिल को यही समझाना रहा,

सदाएं दे रही है उम्र बीती देखो,

तेरा क्यों झिझकना, तड़पना, क्यों शर्माना रहा।।

 तेरे दिल में रहते हुए सादिया गुजर गई,

हमे रहते रहते यहां जमाना रहा ।।

 

प्रवीन सिमरन