इन हाथों में तेरे हाथ की जरुरत है,

मुझे अब भी तेरे साथ की जरूरत है,

जान हो मेरी, मेरी कभी जान ना लेना,

मुझे हर पल सुहागरात की जरूरत है।

 

तेरी नज़रों में बस खुद को देखना चाहूंगी,

नज़रों से उतरकर तेरे दिल में रहना चाहूंगी,

दिल से कहना की छो+ डे ना कभी,

"मै तो तेरा हर दर्द सहना चाहूंगी"।

 

जाने क्या हुआ रातों की नींद को,

जाने क्या हुआ सुबह के चैन को,

कुछ काम नहीं जीने के सिवा अब,

बस याद करती हूं उस ई+द को।

 

ख्वाबों में जीना कुछ मुश्किल सा है,

जल्दी से बाहों में आ जाओ,

समेट कर बाहों में अपनी,

चलो ना मुझ संग पिघल जाओ।

 

प्रवीन सिमरन

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