इश्क किया हे तुमसे , तुम्हारे हर सितम हर रुस्वाई मुझे मंजूर है
तुम्हारे मंसूबो से गर मेरी तबाही लिखी हे ,तो ये तबाही मुझे मंजूर है
इश्क किया हे तुमसे , तुम्हारे हर सितम हर रुस्वाई मुझे मंजूर है
अपने अश्क पे लुंगी , लब सी लुंगी , मिटती रहूंगी तुम पर
मेरे हर अरमानो पर तेरी हर पाबन्दी मुझे मंजूर हे
इश्क किया हे तुमसे , तुम्हारे हर सितम हर रुस्वाई मुझे मंजूर है
तुझ से मुहब्बत की है, तेरे सितमो से भी मुहब्बत करुँगी मैं
तुम जितने भी जख्म दोगे हे हरजाई मुझे मंजूर हे
इश्क किया हे तुमसे , तुम्हारे हर सितम हर रुस्वाई मुझे मंजूर है
❤️❤️प्रवीन सिमरन❤️❤️
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