इस मदहोशी तनहाई बेचैनी की खबर ना थी

 

 

 

 

 इस मदहोशी तनहाई बेचैनी की खबर ना थी,
इस इश्क़ से पहले मुझे, कुछ भी तो तड़प ना थी,

लो चूम लो जी भर के तुम, होंठो से पैरों तक मुझे,
आज खोई हूं इतना मै तुझमें, जितना लाश कबर में सी,

मेरे कांधे का तिल, मेरे सीने का दिल,
उफ्फ धड़कने बेचैन हो कर, दे रही इजाजत लिपटने की,

आओ ना थोड़ा पास और, भरो सांसों में सांस और,
हाय तेरे छूने की चुभन, खो जाओ मेरे साथ और,

कुछ ना कहो, मुझे सुनते रहो,
रहो पूरी रात बाहों में मेरी, बस मुझसे लिपटे रहो।।
हम मिले है तो इस रात में खो जाए,
चल हम अब दो से एक हो जाएं,

बुझा दी लो चांद की, अब कोई नहीं देखेगा,
चलो अब हम दोनों, तारों को ओढ़ कर सो जाएं।।


❤️❤️प्रवीन सिमरन❤️❤️

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