कुछ ज्यादा ना दे बस अपना साथ दे दे,

 

 

 

 

कुछ ज्यादा ना दे बस अपना साथ दे दे,

वादे जन्मों के ना कर सुकून की रात दे दे,

ना चैन है इक भी पल हड़बड़ जिंदगी में,

कदमों से कदम मिला, हाथो में हाथ दे दे।।

 ❤प्रवीन सिमरन

 

जिंदगी का बस इतना फसाना रहा,

जो मेरा है उसका दूर जाना रहा,

बार बार कहता है चल संग चल,

ये कहना तो बस इक बहाना रहा।

 तेरी सांस हूं मैं, तुझमें रहती हूं,

बस यही सोच कर तुमसे मिलकर जाना ना रहा,

तुम कितने बदले बदले से लगते हो,

मेरा तो इश्क, वही सदियों सा जमाना रहा।

 जब जी चाहे तब पास आना,

जी करे चले जाना जब भी जाना रहा,

तेरा इंतजार करते करते,

मेरा तो अभी भी वहीं ठिकाना रहा।

 तुम बिन सूनी सूनी है गालियां इश्क की,

मेरा फिर भी मचलना, तेरे इश्क में नहाना रहा,

तुम्हे सजाना अपनी आंखों में,

तुम्हे उम्र भर चाहना रहा।

 किसी न किसी मोड़ पर तुम मेरे होगे,

मेरा मेरे दिल को यही समझाना रहा,

सदाएं दे रही है उम्र बीती देखो,

तेरा क्यों झिझकना, तड़पना, क्यों शर्माना रहा।।

 तेरे दिल में रहते हुए सादिया गुजर गई,

हमे रहते रहते यहां जमाना रहा ।।

 

प्रवीन सिमरन

 

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