एक नारी होने का अर्थ ये नही है, की वो हमेशा झुकती रहे,

 

 

 

 

एक नारी होने का अर्थ ये नही है, की वो हमेशा झुकती रहे,

ना ही पुरुष होने का अर्थ है की, वो हमेशा जुल्म करे।।

तुम कहो तो दर्द दिल के, संग तुम्हारे बांट लूं क्या,

ये लंबी उम्र की तमाम रातें, संग तुम्हारे काट लूं क्या?

चेहरे पर मुस्कान लिए भी जिंदा हूं,

इस दिल में शमशान लिए भी जिंदा हूं,

जलती चिता सा रहा मेरा ये मन,

ना जी पाई और ना बचा जीवन।।

हाय! उड़ते बादलों सी मै हवा,

ना बन सकी इन बर+सातों की दवा,

उठते उन्मादों की लहर में बहती मै,

दर्द हंसता मुझपर, रोती उमंगे जवा।।

मन की आंधियों में उड़ती चली आई मै,

सुख दुख के बन्धन में किवाड़ सी छाई मै,

ना इधर की ना उधर की रही,

अधमरी सी हूं एक परछाई मै।।

कुचली जाती हूं हर बार किस्मत द्वारा,

ना मिलता है कर्मो का कोई सहारा,

धर्म की रस्सी बड़ी कमजोर है,

कैसे करूं अब इस जीवन से किनारा?

 

प्रवीन सिमरन

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