इश्क़ की गलियों में मुझ संग घूम लेना,
कभी तुम भी प्यार से मुझको चूम लेना,
सजाना कभी अपने हाथों से,
मेरी मांग को,
बिन कहे ही दिल की बातें सुन लेना.......
कमरे में आते ही थाम लेना,
बाहों में बिठाकर कुछ पल चूम लेना,
फिर अपने होठों से धीरे से कांधों को,
चूमते हुए आना मेरी कमर तक......
सिसकियां लेते मेरे होठों से,
आना धीरे से मेरे गालों तक,
बढ़ने देना बेताबी और कुछ पल,
तड़पाते रहना मदहोशी में और कुछ पल..........
आघोष में मेरे लिपट कर कभी तुम,
मदहोश होकर बाहों मै मेरी झूम लेना,
सो जाने का जब मै करू बहाना,
माथे को मेरे हौले से चूम लेना......
कभी किचन में खाना बनाते हुए,
तो छेड़ना कभी मुझे नहाते हुए,
हाथ थामे हर हाल में रखना मेरा,
बस इतना सा ही है अपना मेरा....
कभी लेकर जाना मुझको शिमला,
तो कभी कहीं ले जाकर मुझ संग घूम लेना,
कभी प्यार से मुझको चूम लेना.....2
❤️❤️प्रवीन सिमरन❤️❤️
साँसों की गर्मी बढ़ गयी हे
गूंजने लगी हे सिसकिया,
अब न जाने बालम क्या होगा
अभी तो मेरे होंटो को तुम्हारे होंटो ने सिर्फ छुवा है
चूम लोगे तो आलम क्या होगा
बंद आँखों से महसूस कर रही हूँ इन नजदीकियों को
आँखों खोल दूंगी तो आलम क्या होगा
मेरे चेहरे पर हाथ तुम्हारे सरके हैं तो मदहोश हो हो गयी हूँ मैं
बदन पे हाथ सरकेंगे तो तो आलम क्या होगा
सर से चूमते चूमते बाँहों तक आ गए हो
ये बाँहों का तिल अगर रोक लेगा तुम तो जानम क्या होगा
❤️❤️प्रवीन सिमरन❤️❤️
इस मदहोशी तनहाई बेचैनी की खबर ना थी,
इस इश्क़ से पहले मुझे, कुछ भी तो तड़प ना थी,
लो चूम लो जी भर के तुम, होंठो से पैरों तक मुझे,
आज खोई हूं इतना मै तुझमें, जितना लाश कबर में सी,
मेरे कांधे का तिल, मेरे सीने का दिल,
उफ्फ धड़कने बेचैन हो कर, दे रही इजाजत लिपटने की,
आओ ना थोड़ा पास और, भरो सांसों में सांस और,
हाय तेरे छूने की चुभन, खो जाओ मेरे साथ और,
कुछ ना कहो, मुझे सुनते रहो,
रहो पूरी रात बाहों में मेरी, बस मुझसे लिपटे रहो।।
हम मिले है तो इस रात में खो जाए,
चल हम अब दो से एक हो जाएं,
बुझा दी लो चांद की, अब कोई नहीं देखेगा,
चलो अब हम दोनों, तारों को ओढ़ कर सो जाएं।।
❤️❤️प्रवीन सिमरन❤️❤️
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