उम्र फिसली जाती है हाथों से,
ये जहान अभी बाकी है,
बाकी है ये नदियां अभी,
पूरा आसमां अभी बाकी है।।
तुम यूं बिन बताए गए तो गए क्यों,
मेरे पास तुम्हारा कुछ समान अभी बाकी है,
एक दफा जरा वापस लौट आ,
मुझ पर तेरा एहसान अभी बाकी है।।
जाने कैसी दुनिया है , चलते फिरते साँस लेते पत्थर है यहां,
हे खुदा तेरी दुनिया में तेरा बहुत काम अभी बाकी है,
सबकी तरह तुमने भी गम दिए इतने,
लिखने को हजार गमों का खदान अभी बाकी है।।
ए जिंदगी पास आ बातें कर मुझसे,
अच्छा बता कितने मेरे इम्तिहान बाकी है।।
** प्रवीन सिमरन **
0 Comments: