सुबह आँख खुलते हे जिसका ख्याल आये
वो ही हमारा प्यार हे
दिन भर जिसके जो जहन से उतर न पाए
वो ही हमारा प्यार हे
रस्मो रिवाजो के बंधन में, दामन तो यूँ ही बंध जाते हैं
जो बिन बंधन बंध जाए
वो ही हमारा प्यार हे
बेशक ये रिवाज दुल्हन बना देते हैं सेज भी सजा देते है
पर ये दिल जिस अलांगिन के लिए तड़पता हे
वो ही हमारा प्यार हे
रोज रोज देखो तो अपना खुद का चेहरा भी आम हो जाता हे
जो पूर्ति नहीं सिर्फ एक एहसास हो
वो ही हमारा प्यार हे
❤️❤️प्रवीन सिमरन❤️❤️
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