यूं चुप ना बैठो इश्क का आसमा दे दो,
मै तुम्हारी हूं मुझे अपना आशियां दे दो,
छूकर गुजरते हो जब मैं बहक जाती हूं,
अपना लो मुझको अपनी पनाह दे दो।।
मुझे तो खबर ही ना थी
ये इश्क आखिर होता क्या है,
खिंच खिंच कर तेरी ओर,
मै होकर मजबूर आई हूं।।
कुबूल कर मेरी जान सदके में है अब तेरे,
तोड़ कर सारे बंधन मै जग से दूर आई हूं।
चुन कर बाग से हजारों फूल लाई हूं,
मै तेरे वास्ते सारी दुनिया भूल आई हूं।
मैंने किसी के आँखों में सपने देखे
उन सपनो को तोड़ने वाले ,उसी के, अपने देखे ।।
मैंने कुचलते देखे उसके जज्बात
मैंने मसलते देखे उसके एहसास
वो मासूम सी इल्तजाये उम्मीद भरी
उनको ठुकराते,उसी के, अपने देखे ।।
वो हर रोज एक डाली लगाए जाती थी
उसकी लगाईं वो डाली हर रोज उखाड़ी जाती थी
उन नाजुक पत्तियों को , तिल तिल कर मुरझाते देखा
उन डाली को उखाड़ने वाले ,उसी के, अपने देखे
यों चुप रहना भी बहुत कुछ कह जाता है,
नजरें मिला कर देख दिल क्या समझाता है,
इक बार मुझे अपना प्यार तो समझ,
इश्क की आग में जलकर बड़ा मजा आता है।।
तेरे इश्क भी बिल्कुल कानून की अदालत सा है,
इंतजार मिलने का तारीख पर तारीख सुनाता है,
बेचैनी बढ़ती जाती है जोरों से दिल मचलता है,
तुझे तेरी यादों को सोचना हर लम्हा हर पल मुझे रुलाता है।।
आकर डूब जा तू भी मेरे इश्क के समंदर में,
तू भी मेरे रंगों में आकर घुल जा,
निहार मेरे कांधे के तिल को इक बार,
चूम करके मेरी आंखों को, आकर के मेरे होंठों से मिल जा।।
मदहोशी होती क्या है,
इक दफा जरा फुरसत से समझाना,
मिलने की तारीख पक्की होगी,
सोना नही सारी रात इश्क में भीग जाना,
मंजूर नही अब इक पल की भी खामोशी,
पास आते ही बिन बोले ही शोर मचाना,
बहाना जब में करू सोने का तो,
हलके हाथों से बदन पर फेरकर तन मन के तार जगाना,
ये फासले ये दूरियां समझ ही नहीं पाई मै,
ये क्या है, क्यों है और कैसे है, मुझको समझाना,
और ज्यादा प्यार होने लगेगा फिर,
हाथ थामकर मुझ संग फिर से व्याह रचाना।।
❤️❤️ प्रवीन सिमरन❤️❤️
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